अहसास के पर
उसके उगे नहीं है अब तक ,
बरना बो इतनी बेरुखी न रखता
कबका गले लगा लिया होता ------अनुराग चंदेरी
उसके उगे नहीं है अब तक ,
बरना बो इतनी बेरुखी न रखता
कबका गले लगा लिया होता ------अनुराग चंदेरी
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ब्रक्षों से बेहतर नहीं
तुम्हारा चुप होना ,
क्या बात है
चुप हो कर भी ,
कोई साजिश
रचते हो .---------------------------अनुराग चंदेरी
तुम्हारा चुप होना ,
क्या बात है
चुप हो कर भी ,
कोई साजिश
रचते हो .---------------------------अनुराग चंदेरी
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